कोई आपसे कहेगा हिन्दू बनो कोई कहेगा बौद्ध बनो मैं आपसे कहता हूँ वीर बनो , साहसी बनो , बलसाली बनो , प्रबुद्ध बनो , धनी बनो , शिक्षित बनो , वैज्ञानिक बनो , उसके बाद समझ लेना कि आपको बौद्ध बनना है या हिन्दू। उसके बाद ही आप इस हाल में आयेंगे कि आप धर्म पर चर्चा कर सकेंगे।
और वैसे भी हिन्दू और बौद्ध कोई अलग चीज़ें नहीं हैं।
हाँ आपको अन्धविश्वासो का समर्थन नहीं करना है किसी ईश्वर से कुछ नहीं माँगना है। सच में अगर राम के हाथ में होता कुछ देना तो आज भारत के ४० करोड़ हिन्दू गरीब क्यूँ होते , क्या कोई चाहेगा उसके अनुयायी भूंक से मरें नहीं , हाँ इस मामले में बुद्ध तो पहले ही कह गए मैं तो मार्ग दिखता हूँ चलना तुम्हें ही है। रामायण के रचयता के दिमाग में क्या चल रहा था जो कह गया कि राम राम जपो सब मिल जायेगा , अब सोचना आपको है कि राम राम जपने से कुछ मिलेगा या करम करने से , सोच लो यदि आपको लगता है कि राम राम जपने से रोटी मिलेगी तो जपीए यदि आपको लगता है कि कर्म करने से रोटी मिलेगी तो कर्म कीजिये , मैं यह निर्णय आप पर छोड़ रहा हूँ।
