Saturday, 21 December 2013

वीर बनो , साहसी बनो , बलसाली बनो

कोई आपसे कहेगा हिन्दू बनो कोई कहेगा बौद्ध बनो मैं आपसे कहता हूँ वीर बनो , साहसी बनो , बलसाली बनो , प्रबुद्ध बनो , धनी बनो , शिक्षित बनो , वैज्ञानिक बनो , उसके बाद समझ लेना कि आपको बौद्ध बनना है या हिन्दू। उसके बाद ही आप इस हाल में आयेंगे कि आप धर्म पर चर्चा कर सकेंगे। 
और वैसे भी हिन्दू और बौद्ध कोई अलग चीज़ें नहीं हैं। 
हाँ आपको अन्धविश्वासो का समर्थन नहीं करना है किसी ईश्वर से कुछ नहीं माँगना है।  सच में अगर राम के हाथ में होता कुछ देना तो आज भारत के ४० करोड़ हिन्दू गरीब क्यूँ होते , क्या कोई चाहेगा उसके अनुयायी भूंक से मरें नहीं , हाँ इस मामले में बुद्ध तो पहले ही कह गए मैं तो मार्ग दिखता हूँ चलना तुम्हें ही है। रामायण के रचयता के दिमाग में क्या चल रहा था जो कह गया कि राम राम जपो सब मिल जायेगा , अब सोचना आपको है कि राम राम जपने से कुछ मिलेगा या करम करने से , सोच लो यदि आपको लगता है कि राम राम जपने से रोटी मिलेगी तो जपीए यदि आपको लगता है कि कर्म करने से रोटी मिलेगी तो कर्म कीजिये , मैं यह निर्णय आप पर छोड़ रहा हूँ। 

हिन्दू बौद्ध सिख जैन सबकी स्थति कमोबेस समान

पाकिस्तान में हिन्दू , सिख मर रहे हैं। बांग्लादेश में हिन्दू और बौद्ध पिट रहे हैं। सभी भारतीय धर्मों कि हालत पतली है। इसलिए कोई बड़ी बड़ी बातें न करें , कोई मुझे न बताये कि हिन्दू वीर हैं यदि आज के बौद्ध कायर हैं तो हिन्दू महाकायर। हाँ सिखों को वीर कहा जा सकता है क्यूंकि कम से कम पंजाब में तो उन्होंने धाक जमा रखी है। पंजाब का सिख समुदाय भी पाकिस्तान में सिख कि ख़राब हालत पर मौन ही दीखता है। सिख प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पाक में हिंदुओं सिखों बांग्लादेश में बौद्धों और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर कुछ न बोलना चकित करता है। विपक्षी पार्टी बीजेपी का हाल भी कमोबेस वैसा ही है उसने डेल्ही में पाकिस्तान से आये हिंदुओं को कुछ पैसे देकर अपने कर्त्तव्य कि इतिश्री कर ली है। अब देखना यह है आगे कब उन बेसहारा लोगों कि हालत मुद्दा बनती है या उनका जीवन यूँ ही नरक बना रहेगा। 

Friday, 20 December 2013

अशोक अष्ठमी (7 अप्रैल 2014) - चैत्रशुक्ल अष्टमी को होगा मौर्य विश्वास का शुभारम्भ

अशोक अष्ठमी (7 अप्रैल 2014) - चैत्रशुक्ल अष्टमी को होगा मौर्य विश्वास का शुभारम्भ 


 
मौर्यवंशी समाज अर्थात मौर्य , कुशवाहा , शाक्य , सैनी , वर्मा , महतो , डांगी , कोइरी , कांछी , मुराव तथा सभी मौर्यवंशी इतने उपनाम हैं कि सायद मैं यहाँ उनका उल्लेख नहीं कर सकता।  पर इतना समझ लें कि मैं समस्त मौर्य वंशियों सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के वंसज को सम्बोधित कर रहा हूँ।  आप सभी से अनुरोध है कि मौर्य विश्वास को आर्थिक वैचारिक एवं अन्य सभी प्रकार से सहयोग करें, हमारा न ही कोई राजनितिक उद्देश है नहीं कोई अन्य , हमारा एक ही उद्देश है समाज का विकास।